‘दूर डगर पर’ और अन्य कविताएं

दूर डगर पर दूर डगर पर बिछते जातेडबडबाते दो नयन हैंआओगे तुम कब न जानेरातों करते न शयन हैं । मन का मृग था प्यासा प्यासाआग की नदिया मिलीजल समझ के जल मराआस सब...